शह्जादे
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Altın Yaprak
शह्जादे/ आफ़ताब आलम'दरवेश'
सीमाओ से ना बाँटो,
हम धरती के हैं शहजादे/
देश-देश क्यों जेल बना,
हम कैद हुए क्यों शह्जादे//
रंग-रूप जाति भाषा के,
बंधन में हमें न बांधो/
हम पंछी उन्मुक्त गगन के,
छू आकाश वो शह्जादे //
नदियाँ मिलती सागर से,
सागर से उठता बादल भी/
मुक्त हैं बादल सीमाओ से,
बन बादल वो शह्जादे//
मुठ्ठी ताने जन्म लिया,
क्यों हार गया वो शह्जादे/
जीत हमारी निश्चित है,
मन की सुन वो शह्जादे//
सीमाओ से ना बाँटो,
हम धरती के हैं शह्जादे/
देश-देश क्यों जेल बना,
हम कैद हुए क्यों शह्जादे//
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