अपने अँग के जानि के१ जोबन-नृपति प्रबीन स्तन, मन, नैन, नितंय को बड़ौ इजाफा कीन
Hintçe
मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि
Günün şiiri
Hintçe
मेरी भव-बाधा हरौ राधा नागरि सोइ जा तन की झाँईँ परैँ स्यामु हरित-दुति होइ
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श्री रानी चौहानि कौ करतय देखि रसाल फूलति है मन मैँ सिया, पहिरि फूल की माल॥१॥ दान ग्यान हरि-ध्यान कौँ सावधान सब ठौर श्री रानी चौहानि है रानिनु की सिरमौर॥२॥ नित असीस हौँ देत हौँ उर म…