अपनाते अपनाते.. Apnaate

M Mehta Hasmukh Amathaal Mehta Hasmukh Amathaal
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अपनाते अपनाते सोमवार, ९ सितम्बर २०१९ आए है तो जाना है दिल को खूब मनाना है मौसम खूब सुहाना है नया दिन और नया जमाना है। मौत को गले लगाना है परायों को अपनाना है ना किसी से गीला ना वेर रखना है अपने में ही मस्त रहना है। किसी के दुःख में, में काम आऊं किसी का दामन बन जाऊं कोई मांगे सहारा यदि में दे पाऊं जीवन के उजाले को में सम्हाल पाऊं। ख़ुशी इतनी है की उछल में जाऊं किसी के बुढ़ापे की लाठी में बन जाऊं मेरी ख़ुशी का आज ठिकाना नहीं मनाना है मुझे अपना जन्मदिन यही जीवन को मुझे मेहकाना है फूलों को अच्छी तरह से सजाना है उनमे जान फूंककर सजीवन बनाना है जान है तो जान को भी समजाना है। आज मुझे सब सुभेच्छाए देंगे दिल से अपनी मनोकामना भी देंगे मेरा जीवन उज्जवल रहे और सुख से बीते यही बात मैंने समजी है सबको अपनाते अपनाते। हसमुख मेहता

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