बाहर का सुख.. Bahar
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Altın Yaprak
बाहर का सुख
बुधवार, १० जून २०२०
अंदरूनी ताकत को समझो
अपने आप को पूछो
आप को किस से संतुष्टि मिलेगी?
क्या सृष्टि मिल जाय तो संतृप्ति मिलेगी?
बाहर का सुख
ओर अंदर का दुःख
करे आप को हमेशा विमुख!
ये दोनो कारन है प्रमुख।
सुख की अनुभूति ही है सफलता की चाभी
बाकी भले आप को ना भरे हामी
यदि आपको सुख का अनुभव होता रहता है!
फिर आपने अपने आपकी ही सुनना है।
बाहरी सुख का चयन ही दुःख का कारण है
ना मिले तो मन को आपत्ति हो जाती है
मिलने के बाद भी सुख की की गारंटी नहीं है
नकली सुख आनेपर नौटंकी होती रहती है।
यदि मन में सुख अंबार है
ओर सोचता है ये बाहरी सुख क्षणिक गुब्बार है
फिर आपका पासा पोबार है
सुख का अनुभव बारबार है।
हसमुख मेहता
साभार: s r chandrslekha
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