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Altın Yaprak
बना दिया अपना
बुधवार, १९ सितम्बर २०१८
श्याम मोरे
कभी ना हुए मेरे
बसे सब के दिल में
पर सुख मिला मुझे पल में।
में राच रही सपने में
रचाती रही दुनिया में
अलग से किया एक सुनहर सपना
और दिल से बना दिया अपना।
बनवारी
देखो तो बलिहारी
में तो कभी दिल से ना हारी
बारी वारी जाऊं मुरारी
जहां भी नजरे गुमाऊं
आप ही के दर्शन पाउ
दिल से धन, धन हो जाऊं
सुख स्वर्ग का भोग पाऊं।
तुम बसे हो सब के घट में
श्यामबिहारी कुंज गली में
सब प्यासे है, देखने को अभिलाषी
में तो हूँ अभी कन्या सोडषी।
आन मिलो
कह भी तो लो
"संसार सारा मेरे बस में "
में बसा हूँ कण कण में।
प्रेरणा: कमलजीत ग्रेवाल
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