चाहिए एक लकीर Chahie
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Altın Yaprak
चाहिए एक लकीर
सब नही होते फ़क़ीर
चाहिए एक लकीर
रहोगे गुमनाम राहगीर
पर बन जाओगे अमीर।
अपना क्या है?
अंदाज़ तो पुराना है
कईयोंने ने तलाशा
पर हाथ लगी सिर्फ निराशा।
जीवन में क्या पक्का है?
सोचो तो यही मक्का है
गंगा में डुबकी लगाते ही पावन हो जाओगे
आनेवाले कल को खुद ही जान जाओगे।
फकीरी में अमीरी
ये तो चीज़ है अलगारी
अपनी मौज में मस्त
भले ही बाकी सब रहे त्रस्त।
धन और ऐश्वर्य हरदम साथ नहीं देता
बचपन और जवानी एक सरीखा नहीं रहता
साथ छोड़ जाते है अगले पड़ाव की और
पकड़ना हमने है कोई एक छोर।
रहो मस्त यदि दरिया पास नहीं
चमन है तो फिर आस की कमी नहीं
कल तुम्हारा दिन निकलेगा सही माइनो में
आज तो खुश रहो देखकर आईने में।
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