जोर नहीं..Jor
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Altın Yaprak
जोर नहीं
शनिवार, ११ दिसंबर २०२१
हुस्न पर कोई जोर नहीं
प्यार कभी कमजोर नहीं
ना हो उसपर कोई शोर
बस बढ़ने दो उसकी और डगर
ना छोडो उसपर कोई शगूफा
कभी ना कहो किसीको बेवफा
यह ही तो कसम और रहो वफ़ा
ना सोचो क्या होगा उसमे नफ़ा!
उसमे है नफ़रत मिटा ने का जज्बा
सच्चे प्यार का बढ़ता है रूतबा
ना मचाओ उसपर हाई-तौबा
बहने दो दूसरी और हवा।
हम तो है कायल
जब गाती हो आप बन के कोयल
हवा भी खो देती है अपना रुख
कहता है आपको ये जनाब 'हसमुख'
हुस्न है तो दुनिया है खूबसूरत
जिसको कह देती है मेरी मूरत
वो तो हो जाती है ना देखती है मुहूरत
बस दे देती है तोहफा दुदरत।
हुस्न की करो तारीफ़
पर कभी ना बनो हरीफ
खेतो में बनो फसल खरीफ
बस सोचो और ना दो तक़्लीफ़
हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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