जीवन सन्देश Jivan
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Altın Yaprak
जीवन सन्देश
Monday, December 25,2017
11: 07 AM
जीवन सन्देश
तुम हो अवनि
मै हूँ ध्वनि
कहानी अपनी अपनी
कही और अनकही।
एक दूसरे के पूरक
प्यार भी हुआ अचानक
मिली आँखे चार
बढ़ता गया प्यार।
तुम कहो तो बन जाऊं
बादल, फिर भी प्यासा रह जाऊं
कभी वन में रह जाऊं
कभी खड़ा खड़ा मुस्कुराऊँ।
में रहूं धरातल
तुम बहो बनके ज़ल
फिर भी बना रहेगा संगम
क्यों रहेगा फिर गम?
तुम खलखल बहते जाना
अपना संगीत सुनाते रहना
में मस्त हो जाऊंगा
जीवन का सन्देश शायद समज पाउँगा
मिले या न मिले
रहे आसमान तले
देखते रहे कुदरत का नजारा
बित ना जाए यूँही जन्मारा।
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş