खुद्दारी से Khuddari
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Altın Yaprak
खुद्दारी से
मेरी बसी है जान
फिर भी में रहा अनजान
तिरंगा मेरी रहा है शान
लुटा भी दूँ जान।
फिर भी शांति का चाहक
मेरे देश कामें बनु संवाहक
यदि में कुछ काम आ सकूँ
अपने आप को अदना सेवक कह सकूँ।
बलिदान देना चाहता हूँ
अपने खून का एक एक कतरा उसके लिए रखाहूँ
पता नहीं किस मोड़ पे में देश के काम आ सकूं
अपने आपको धन्य महसूस कर सकूँ।
उसका रंग तो देखो
त्याग और बलिदान के जज्बे कोसामने रखो
देश के लीए आप गर्वान्वित हो ने का अनुभव करेंगे
देश के लोए सब लुक न्योछावर कर देंगे।
यही है देशभक्ति और मिसाल
देश रहेगा खुशहाल
जनता भी रहेगी अमनचैन से
गर्व से ऊंचा सर रखकर कसम खाएंगे खुद्दारी से।
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