मोरे श्याम.. MORE SHAM
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Altın Yaprak
मोरे श्याम
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राधे श्याम
अब हो गयी है पूरी शाम
आप कहाँ हो मुरली मनोहर
हमारे चहेता सबके गिरधर। ओ मोरे श्याम
कहे बिना तुम गए कहाँ हो?
सारा जहाँ जैसे वीरान हो गया हो
अब तो बरसादो प्रेम की दो बुँदे
सकल जग सारा आपको वंदे। ओ मोरे श्याम
मुरली की धुनपर नाचा जग सारा
मन को हरा पर दिल को विसारा
ये कैसी प्रीत है नटवर नागर?
आप का दिल है जैसे सागर। ओ मोरे श्याम
गागर सुना पनघट भी सूना
ये कैसा विरह है काना
मन की मर्जी से सब कुछ करना
पनिहारी कि गगरी फोड़ना। ओ मोरे श्याम
राधाजी भी दुखी है ग्वाले भी दुखी
आप कैसे रह सकते है अकेले सुखी
मीरा के तुम हो नटवर नागर
प्रेम के प्रतिक और श्री गिरधर ।ओ मोरे श्याम
अब मन जाओ, वापस चले आओ
मुरली धुनको फिर से बजाओ
तरुवरकी साया आपको तरसे
हेत की कि भाषा मुरली से बरसे। ओ मोरे श्याम
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