ऋत आए....Rut
M
0
Altın Yaprak
ऋत आए
शनिवार, २७ जुलाई २०१९
ऋत आए, ऋत जाए
मेरे मन को खूब सताए
सावन का रूखापन
ना लगे अपनापन।
मेरे दिल को ना मिले चैन
सब में लगे परायापन
कोई लगे ना मेरा
बस आता रहे रोज सवेरा।
बाग़ में खिलते फूल न्यारे
खिलते रहते हंसी के सहारे
मुझे लगा रहता, क्यों बेसहारा?
जिंदगी से में क्यों हारा?
पतझड़ को भी आना होगा
सावन को भी जाना
बारिश का भी इंतजार रहेगा
कब तक मन यूँही बेचेन रहेगा?
संसार का ये एक रूप है
अपने आपको खुद देखना है
यह क्रम तो चलता रहेगा
हमें खुद को सोचना होगा
हसमुख मेहता
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş