स्त्रियों की सुरक्षा.. Stri
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Altın Yaprak
स्त्रियों की सुरक्षा
गुरुवार, १२ जुलाई २०१८
निर्भया
तुमने जान को गंवाया
दरिंगी के खातिर
हम निकले बदमाश और शातिर।
कितनी भी भर्तस्ना हम कर ले!
कितने ही वचन ले ले
हम उसे समाप्त नहीं कर सकते
कब किसी में शैतान प्रवेश कर ले, नहीं कह सकते।
हम सिर्फ क्षमा ही मांग सकते है
लोग दरिंगी की सीमा लांग लेते है
बाप बेटी का लिहाज नहीं करता
रिश्तेदार सम्बन्धो का हनन करते नहीं डरता।
सही मायनो में कलियुग हम में समा गया है
हमारे उसूलों को खोखला कर गया है
हमारी आँखों में पर्दा डाल गया है
इंसानी रिश्तों को शर्मसार कर गया है।
क्या देहांतदंड ही इसका इलाज है?
किसी को बेइज्जत करना जायज है?
"घृणास्पद काम करके मार देना " कितना उचित है
समाज में रहना है तो स्त्रियों की सुरक्षा हमारा जिम्मा है।
हसमुख अमथालाल मेहता
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