सांवरिया Saawanriya
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Altın Yaprak
सांवरिया
सांवरिया
मेरे मन बसियां
दिल में बस भा गया
फिर खो गया
में मन ही मन मचलता रहा
उसने कभी ना सूना
में फिर से गुन गुनाया
उसने बहाना बनाया
साँवरिया की प्रीति है ऐसी
दिल कों मेरे छूने लगी
में हो गया उसका दीवाना
जैसे चड़ा परवान परवाना
वो तो था अकेला रागी
परमे कैसे बनु बैरागी
न ले सकुं में नाम ऱाधा का
में तो रहूंगा सिर्फ मीरा का
Bu şiiri puanla
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