ख़ुशी नहीं मिलती....Khushi
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Altın Yaprak
ख़ुशी नहीं मिलती
बुधवार, १ सितम्बर २०२१
खुशी नहीं बिकती बाजार
खुशी नहीं मिलती उधार
उसका आनंद है अपार
जैसे बहती नदिया धार।
ख़ुशी से बनता जीवन
मानो नंदनवन
ना रहे दुःख मन में
ना पीड़ा रहे तन में।
ख़ुशी का अनुभव
जैसे लगता है वैभव
कट जाता सारा भव
हर्ष के साथ पार उतरे नाव।
जीवन में कभी नही आता तनाव
ऐसा नहीं आने देता कोई बनाव
ज़िंदगी मानो होता एक चुनाव
नहीं गिरना होता बस आता सिर्फ चढ़ाव।
ख़ुशी का अलग होता नजारा
हम तो है सिर्फ बंजारा
हर मोड़पर महसूस होता रंग सुनहरा
ख़ुशी से भरपूर संसार हराभरा।
डॉ. हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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