दिल नही मानता..... Dil Nahi
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Altın Yaprak
दिल नही मानता
गुरूवार, १९ अगस्त २०२१
हर चीज समज नहीं पाता
कहने को हरबार तरस जाता
मन में ग्लानि भर जाता
दिल को उसका एहसास करा जाता।
दिल है की मानता ही नहीं
हर बात को कहता सही
वो कहते है की अभी फुर्सत नहीं
कोई भी मुलाकात संभव नहीं।
आजकल दिल की कौन सुनता है
कौन दिल से पुकारता है?
अपने मन को सम्हालता है
और दूसरे को भी प्यार का तोहफा देता है।
आपको फुर्सत नहीं
हमे मिलने की इजाजत नहीं
दम घुटता रहता है हरपल
मुश्किल से कटती है ये पल।
दिल है तो अरमान है
अरमान है तो आदरपान है
आदरपान है तो खुल्ला आसमान है
उड़ने के लिए पंख वायुयान समान है
दिल का मिलना एक तर्क यही है
बस सोचने का फर्क है!
बिना प्यार जिंदगी एक नर्क है
मिल जाए यदि प्यार तो वो स्वर्ग है।
डॉ हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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