Bahut Hua
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Altın Yaprak
टूटे हुए दिल का तराना बहुत हुआ
दुनिया में तेरे अपना फ़साना बहुत हुआ
चर्चा जो हुआ बज़्म में शामो सेहर हुआ
इस रात में शम्मा का जलना जलाना बहुत हुआ
मिलती गयी जो मोहलतें वो भी बहुत हुई
तेरा यहाँ पे छूपना छुपाना बहुत हुआ
साहिल पे आ गया है"आशी' थक और हार कर
अब लहरों का ये उठाना उठाना बहुत हुआ
Bu şiiri puanla
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