Chal Uth चल उठ
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Altın Yaprak
दे रही है सदायें मंज़िलें पुकार कर
क्यों बैठा है तू थक और हार कर
मुश्किलें है जो राह में, वो हौसला देने को हैं
तेरे आँखों की चमक, सपने संजोने को हैं
तू नहीं चलेगा तो कोई और चल पड़ेगा वहां
रास्ते कई हैं उसके, मंज़िल सब की वो ही तो है
आज कर हिम्मत चल उठ बढ़ा दे अपने कदम
जोश तेरी रगों में है और हौसला सीने में है
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