Dil Ka Haal
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Altın Yaprak
ये दिल बहल जाता है उनकी आँखों की चमक से
मैं जानता हूँ इसको ये, शैतान बहुत है
अरमान बहुत रखता है, उड़ने की हवाओं में
आंधी से डर ये जाता, नादान बहुत है
लेता हैं ये बालाएं ज़माने भर की खुद में
न जाने कितनो पे ये, मेहरबान बहुत है
यादें भी ये संभाले, वादों को भी हैं रखे
और हंस के फिर है कहता`~ दर्द का सामान बहुत है
ये दिल ही तो है जो चला रहा है "कश्ती"
जाने कब कह दे अब, तूफ़ान बहुत है
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