Ek Pathhar Ki Maut
M
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Altın Yaprak
Original poem by: M. Jalaluddin Rumi
एक पत्थर की मौत मरा और पेड़ बन गया
एक पेड़ की मौत मरा और जानवर बन गया
और जब जानवर की मौत मरा और इंसान बन गया
क्यों मै मौत से डरूँ? क्या खोया है मैंने इसे पाकर?
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş