कसक दिल कि Kasak Dil Ki
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Altın Yaprak
दो दिलों के फ़ासलों को उम्र भर जलना पड़ा,
रात आयी और गई दिन आया और गया I
तुम अकेले भीड़ में, मै भी अकेला भीड़ में,
लोग आये और गए कारवां चलता गया I
मंज़िलें मिलती गई और हौसले बढ़ते गए,
मुड़ के जब पीछे को देखा धुंध और धुंआ मिला I
यूँ तो अक्सर बात करने को न कोई भी मिला,
राज़ दिल में ही रहा और दिल अंधेरों में रहा I
Bu şiiri puanla
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