क्या फर्क पड़, , , (Hindi Poem) What Difference Does It Makes
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Altın Yaprak
ग़म की दुनिया
सितारों से भरी है
या आंसुओं से
क्या फर्क पड़ता है
नींद तुम्हे आए
यहाँ दिल जलता रहा
दिन हो या रात
क्या फर्क पड़ता है
मर्ज़ हद से बढ़ गया
दवा भी काम न करे
छोड़ दो उसके हाल पे
क्या फर्क पड़ता है
किसी का तमाशा बन गया
लोग हँसने लगे उस पर
अब तस्सली दो या न दो
क्या फर्क पड़ता है
जुस्तजू में जिसकी
बर्बाद हो गए वो
अब दुनिया के सवालों से
क्या फर्क पड़ता है
तसव्वुर में मिलते हैं
आँखों में रहते हैं
मिलते नहीं अगर वो
क्या फर्क पड़ता है.
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