Koi Bhi Jeevan - Any Lifetime
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Altın Yaprak
Original Poem: Any Lifetime
By: Maulana Jalaluddin Rumi
वह जीवन ऐसा बीता जिसने भगवान न देखा हो
जैसे मृत्य पड़ा था वो या फिर निद्रा से उठा न हो
वह पानी जो प्रदूषित हुआ वह जहर समान हुआ
और वो ज़हर जिसने शुद्ध किया वह पानी समान हुआ
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş