Poesy - कविता
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Altın Yaprak
Original Poem: Poesy
By: Freni Karaluthara
Translation By: M. Asim Nehal
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मेरी कविता क्या तुम मेरे साथ चलोगी?
कहीं दूर, जीवन की एकांत गली में
जहाँ जलती हुई मोमबत्ती रुपि आत्मा में
मैं चुपके तुम्हारी नज़र में अपना प्यार महसूस करूँ I
' चलो मेरे साथ ', मैं तुम्हारी आत्मा से बातें करना चाहता हूं।
छिपा लो मेरे दुःख अपने अपने गद्य और पद्य में ।
और रोने दो अपने प्रतीक चित्र में छिपकर,
जहाँ से मैं इस दुनिया से बातें करता रहूँ ।
और जब मैं अकेला और ठगा हुआ महसूस करूं
तुम मेरी तरफ और करीब चले आना ~
मेरी आत्मा का बोझ सांझा और दूर करने,
और मुझे हँसाने और सांत्वना देने ।
मेरी कविता मैं तुम्हारी आँखों से देखना चाहता हूँ,
इस दुनिया की जादुई सुंदरता को ~
जहाँ बहते झरनों के किनारे पंछी मधुर गीत गाते हैं,
और प्रकृति का सौंदर्य फूलों की महिमा से सुशोभित होता है I
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