सौर्मंडल का राजा
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Altın Yaprak
सौर्मंडल का राजा सूरज और तुम उसकी रानी हो
वो दिन में है राज चलता और रात को बनाती सुहानी तुम
कैसे देखो चोरी चुप्पे तुम रातों को आ जाती हो
चांदनी बिखेर कर तुम सबका मन हर्षाती हो
सूरज तुम्हे पकड़ न पाए रूप सदा बदलती हो
छोटे से बढ़ते बढ़ते फिर धीरे से घाट जाती हो
एक दिन तो न जाने तुम जा कर कहाँ छुप जाती हो
हर रूपतुम्हारा सुहाना लगता हर्र रंग मेंछा जाती हो
रातों को चांदी करती हो पेड़ो को सजाती हो
बादल के संग खेला करती गीतों मेंसमाती हो
जुगनू में चमक भर कर तुम परियों संग बतियाती हो
जब चौदा दिन की होती हो लहरों को मचलती हो
आँखों से तुम दिल मेंउतरकर साँसों को धडकती हो
अँधेरे में निर्भय रहने का मुझको पाठ पढाती हो
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