अनुवादक की सीमा
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Altın Yaprak
भावना की वाहक जैसी भाषा
भाव का अनुवादक भी...
कुछ गैप अक्सकर रह जाती है
भावना और कलम के बीच
मन करता है भर दूँ उसे....
निगेटिव से श्वेत-श्याम तस्वीर
पाने के लिए छायाचित्रकार जैसे
दिन-रात डूबे रहते हैं अंधेरे में
मैं भी ढूंढता रहता हूँ...
कभी-कभी निकल भी आता हूँ
निकास द्वार पर;
भावना तो तरस रही है मुक्ति के लिए...
सोचता हूँ गहराई से
अगर मैं ला सकता, एलबम में छुपे हुए
वे सारे दिन को कविता में;
यदि मैं रंगीन कर सकता
जीवन-प्रभात में खींची हुई
सारी तस्वीरों को
कुछ स्मार्ट ऐप
इस्तेीमाल करके...
अनुवादक की सीमा पार होकर
कब से शुरु होगी कविता की
अंतर्जाली यात्रा...
अनुवाद: 24-07-2019.
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