हमारी बिरासत

R ramesh rai ramesh rai
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मिटती नही हमारी हस्ती इतना तो समझ लीजिए चाहे जितना भी हो सके हर बार आजमा लीजिए। सिकन्दर भी आयें आकर चले गए जाना तो था ही उन्हें खाली हाथ चले गए। कितने और भी दरिंदें आये हर बार आजमा गए मिटती नहीं हमारी हस्ती अपना मुंह काला कर गए। यह भूमि है राम और कृष्ण की यह भूमि है बुद्ध और महावीर की यह भूमि है गुरु नानक देव जी की यह भूमि है गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की। यह भूमि है महाराणा प्रताप की यह भूमि है छत्रपति शिवाजी महाराज की। यह वही भूमि है जिसे अकबर और टीपू ने गले लगाया था। यह वह भूमि है जहां जर्रा जर्रा पूजे जाते हैं। यह वह भूमि है जहां वेद की ऋचाएं लिखी गई। तक्षशिला और नालंदा ने बिखेरा प्रथम विश्व को ज्ञान का प्रकाश चाणक्य और चन्द्रगुप्त ने तोड़ा शौर्य का मिथ्या अभिमान फिर सम्राट अशोक हुए विश्व और मानवता के शान्ति दूत। सत्य और अहिंसा के है पुजारी इसे कमजोरी न समझ लेना हो सके तो तुम भी इसका दामन थाम लेना। हम टूटेगें नहीं, झुकेंगे नहीं बिखरेंगे नहीं कितने भी आंधियां आए बस एक स्वर में हम सब मां भारती का गीत गाएंगे। तुम्हें तोड़ना आता है हमें जोड़ना आता है तुम जिन्दगी के बाद हो हम जिन्दगी के साथ है। तुम संस्कृति के घातक हो हम संस्कृति के चातक है तुम मजहब मजहब रटते हो हम मजहब के रक्षक है। हम गीत वही गाते हैं जो इंसानियत का पैगाम देता है वसुधैव कुटुंबकम् का पाठ पढ़ाता है जियो और जीने दो सिखलाता है। हम उस बूत के उपासक हैं जो कण कण में समाया है जो फूलों में खुशबू देता है पेड़ पौधों को हरियाली देता है। हमारी बिरासत है अटल जैसे खड़ा हिमालय प्रबल चाहे जितना जोरलगा लो क्योंकि इंसानियत के हैं रक्षक। सर्वाधिकार सुरक्षित @ रमेश राय ०६/३/२०१९

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