कहकशा
V
0
Altın Yaprak
तारों की दुनिया है निराली
सोये जब जहा सारी
टिमटिमाये ये तारा प्यारी।।
अंजन सुन्हेरी गलियों में
ले चले हाथ थामे
मानो जैसा साथी हो हमारे।।
गुमनाम अनजान वो गालियां
लगी ही नहीं कभी आउट ऑफ़ दुनिया
मानो जैसे हम हो वो हो
और ये खिलखिलाते तरे।।
गलिया खुशहालीयों वाली
गालियां बढ़ोशियो वाली
ना जाने कहां चुरा ले गए
मेरी ये रुसवाई।।
न खट्टा मन न पीस्ता तन
बस जो है वो है भोला मन
जो बुनता ख्याल अनंत
चाहे हो दिन या फिर रात।।
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş