सुराही
V
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Altın Yaprak
गर्मी जब चिलचिलाती हो तो
सुराही की सक्रा गला
तृप्त करता सूखता गला ।।
मनन भी अपना कुछ ऐसा ही है
दिखता हो तंग और सकरा
पर समा लेता विशाल जनता ।।
देता ठंडक धूप के बौछार से
अपना मन अच्छा
तो सबकुछ अच्छा ।।
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