इश्के रसूल/ Hindi
A
0
Altın Yaprak
इश्के खुदा, इश्के रसूल,
मेरा वसूल-मेरा वसूल,
मेरा वसूल-मेरा वसूल/
खाक में मिलने वालो सोंचो,
क्या है वजूद-क्या है वजूद//
क्यों आए इस धरा पे हम,
सोंचो कर लो आंखे नम,
खिदमते खल्क, बड़ा हुनर,
होगा देखो दुआ कबूल//
इश्के खुदा, इश्के रसूल,
मेरा वसूल, मेरा वसूल.....
‘दीन और दुनिया’ के रहबर,
रुक गए क्यों भला यूँ रहपर,
सीधी रह पर चलें अब हम,
फिर बरसेंगे हम पर फूल//
इश्के खुदा, इश्के रसूल,
मेरा वसूल, मेरा वसूल, //.....
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş