अंतिम घडी..Antim
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Altın Yaprak
अंतिम घडी
मंगलवार, १३ जुलाई २०२१
तुम्ही तो हो मेरे श्याम
मेरे घनश्याम
हर काम आते हो
मेरे राम।
तुम बिन अधूरा
ये जग है सारा
मेरी सांस में समाया
जब तेरा नाम जपाया।
सारी दुनिया ने अपनाया
एक ही राग सब ने गाया
मशगूल हो गए माया
दूसरों का ही खाया।
माला जपते जपते गुजर गया
सामने आ गया मौत का साया
फिर भी माया न छोड़ी
रब ने बनाई ये कैसी जोड़ी?
में सामने है जग खड़ा
में अपने आप से ही लड़ पड़ा
खूब कोसा, खूब लताड़ा
जिंदगी बन गया था एक अखाड़ा।
गुजर गया ज़माना पलकों के सामने
सब नजर आ गया मेरे सामने
रूबरू हो गए आमने -सामने
सर झुकाना पड़ा मने- कमने।
अब तो एक ही नाम
बचालो मेरे तुम ही राम
जिंदगी तो बित गई है
अंतिम घडी बीदाई की आ गई है।
डॉ हसमुख मेहता
साह्त्यिकी
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