चाय पे चुस्की.. Chaay
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Altın Yaprak
चाय पे चुस्की
सोमवार, १४ सितम्बर २०२०
सुबह की मस्ती
लेते चाय की चुस्की
साथ मे बैठी है घरवाली
तेज तर्रार और मतवाली
घर में है उसका रूतबा
हर तरफ चर्चा ही चर्चा
देती है मुझे ऊर्जा
पर बढ़ा भी देती है कर्जा
कट रही है जिंदगी
कर रहे है बंदगी
रखा है मन्त्र सादगी का
कभी नहीं लेते नाम खफ़गी का ।
चाय से सफर शुरू
द्वंदवयुध्ध चालू है अंदरू
में रहा बेचारा गभरू
मन ही मन प्रभु को समरू।
अब वो नहीं इस दुनिया
मजा हो गया किरकिरा
चाय भी लगने लगी है फीकी
क्योंकि भूल जाते है डालना चीनी।
चाय की चुस्की का स्वाद
लेता मे रहा जिंदगीभर स्वाद
अब धीरे धीरे भूल रहा
कुछ कहना है तो मन ही मन कहा।
सुबह होती और उसकी याद आती
हमेशा चाय की प्याली थमाती
पीठ भी थपथपाती और नाश्ता कराती
अब ना नाश्ता है ना चाय की प्याली।
डॉ जाड़िआ हसमुख
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