चाय की प्याली...Chaay
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Altın Yaprak
चाय की प्याली
शनिवार, २५ सितम्बर २०२१
हाथ में चाय की प्याली हो
मन में तस्वीर मतवाली हो
सुबह की किरण आनेवाली हो
जीवन में करनी उजाली हो।
मन मचले ऐसा मौक़ा हो
समय का भी ऐसा तकाजा हो
मन मे उठता सागर का तूफ़ान हो
दर्रिया के मौजे उफान पर हो।
कुछ करने गुजरने का जज्बा हो
अपने आप का एक रूतबा हो
ना रुकनेवाला एक सफर हो
बोले गए वचन रहते अफर हो।
हवा के जोंके दिल को मचलाते हो
पंखी अपने माले में चिहराते हो
उड़के गगन में विचरते हो
मनुष्य जीवन में बारे में सोचते हो?
चाय की प्याली में है ताजगी
प्रेरे मन को करने बंदगी
सुख से कट जाए ये जिंदगी
सर पे लगे हमेशा कलगी।
डॉ. हसमुख मेहता
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