मेरे ही दिलका मतवाला

M Mehta Hasmukh Amathaal Mehta Hasmukh Amathaal
0 Altın Yaprak
मेरे ही दिलका मतवाला वो कौन है, वो कौन है? जो मेरे दिल को भाया मैंने जब भी उस को पुकारा मेरे सामने ही पाया सवेरे वो चमकता है दुनियाको को भी चमकाता है वो मेरा सूरज है तपता हुआ कितने दिनो के बाद मेरा हुआ मेरी तपस्या और गहरी लगन सफल हो गयी और आकर गयी मगन में देखू उजाला और तपता हुआ सूरज भी अब जैसे मेरा हुआ वो तो है सब का पथदर्शक में तो रह ही जाऊ महक महक उसकी एक झलक मुझे पावन कर देती है हवाके झोंकों से मुग्ध कर देती है आंखे में मिला सकती नहीं और इच्छाओ को रोक सकती नहीं भले दुनिया का वो भला करता रहे मेरे मंन की मुरादों को, धीरेसे सुनता रहे पवन, वायु, समीर चलते है तेरे से में फिर क्यों रहू पीछे तेरे से जगत का तू है रखवाला मेरे दिल का, मेरे ही दिलका मतवाला

Bu şiire çeviri ekle ·

Bu şiiri puanla

Henüz puan verilmemiş

Yıldıza dokunarak 1–10 arası puan ver

Yorumlar

Yorum yapmak için giriş yapmalısın.

Giriş yap

Bu şiire henüz yorum yapılmamış. İlk sen ol.

Sana daha iyi bir okuma deneyimi sunabilmek için sitemizde çerez kullanıyoruz. Kişisel verilerin KVKK ve GDPR kapsamında işlenir; hangi çerezlere izin verdiğini dilediğin zaman değiştirebilirsin.