नहीं लगता दिल .. Nahi
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Altın Yaprak
नहीं लगता दिल
शुक्रवार, २१ अगस्त २०२०
रात कटती नहीं
परेशानी घटती नहीं
दिन जाता नहीं
दिल को कुछ भाता नहीं।
मेरे दिल के उजाले
अब हो गए काले
हम थे दिल के मतवाले
निकले थे दुनिया बसाने।
मिल तो गया हम ने चाहा
पर उन्हों ने नहीं सराहा
भरपूर कोसा और इल्जाम लगाया
मेरे मन को ये सब नाही भाया।
क्या कुसूर था मेरा चाहने में?
क्या गुनाह था फल को चखने में?
हम बैठे थे, आँख लगाए
वो चल दिए ना आंख मिलाए!
इस से तो अच्छा मार ही डालते
पर अपशब्द तो ऐसा ना बोलते
जीते जी मुझे मार ही डाला
सपनों के मेरे रोंद ही डाला,
अब ना रहा मजा जिंदगी में
नहीं लगता दिल उसकी बंदगी में
मन ही मन में रोता रहा हूँ
किस्मत को अपने कोसताा रहा हूँ।
डॉ जाड़िआ हसमुख
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