पक्की है दोस्ती .. Pakki
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Altın Yaprak
पक्की है दोस्ती
Friday, August 7,2020
11: 50 AM
ना करू इसकी कोई वकालत
और नाही करू इसकी शिकायत
होती रहती है खूब शरारत
भागते है, दौड़ते है, खूब मिलती है कसरत।
न मिलो तो हो जाती है फिकर
दोस्ती तो ऐसी है की मानो दूध में मिली है शक्कर
धूल -मिल गए है एक दूसरे में
एक की जान अटकी है दूसरे मैं।
दे देते है जान एक दूसरे की लिए
मर मिटते है काम करने के लिए
वफ़ा का दुसरा नाम है दोस्ती
इसमें कभी नहीं होतीफिरका परस्ती।
यदि पक्की है दोस्ती की नींव
तो चेन से आती है नीद
नहीं लगती कोई फीकर
हम सदा घूमते है बेफिकर।
यदि दोस्ती की नीव हो गहरी
तो दोस्त बन जाता है प्रहरी
दुनिया लगती है हरीहरी
नही लगती कोई भी दुरी।
दे देते है जान एक दूसरे की लिए
मर मिटते है काम करने के लिए
वफ़ा का दुसरा नाम है दोस्ती
इसमें कभी नहीं होतीफिरका परस्ती।
ऐसी दोस्ती से हमें है फक्र
रहते है हमेशा शुक्रगुजार
जीवन के बाजार में बनी रहती है साख
यदि आ जाए मन मे खोट तो हो जाती जलकर राख।
डॉ. जड़िआ हसमुख
साभार: स. र. चन्द्रसलेखा
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