प्रभु मोरे.. Prabhu
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Altın Yaprak
प्रभु मोरे
गुरूवार, ७ मई २०२०
प्रभु मोरे अवगुण चित ना धरो
संसार राखो हरो भरो (२)
मैंने तो कर दी कश्तीहवाले
अब आगे ले ले या डूबाले
हम तो है दिल के मतवाले
बाकी मर्जी तेरी, उपरवाले।
हम तो भरे है, सब गंदगी
बाकी गुजारनी हैजिंदगी
मेरे ख्वाब ना अधुरे रह जाए
तेरी किरपा से टूट ना जाए।
मन मेरा रहता सदा चंचल
इकट्ठी करता सम्पति अचल
भागा फिरता संसार भोगने
आह्वाहन करता, रोगो ने।
वैसेही गुजर जाएगी
जिंदगी तमाम हो जाएगी
निखार कभी ना दिखा पाएगी
इंसानियत के दर्शन ना कर पाएगी।
भला-बुरा में पहले से हूँ
तेरी किरपा का अभिलाषी अभिलाषी हूँ
कुछ रख देना अंश मानवता के
धन्य हो जाऊंगा जतन करके।
लाख करू पर सम्हल ना पाऊं
तेरे दर्शन करके, धन्य हो जाऊं
मेंमाधो बन के चरणों में रोऊँ
पापों को धोकर सुख को पाऊं।
हसमुख मेहता
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