तेरी जान कोteri

M Mehta Hasmukh Amathaal Mehta Hasmukh Amathaal
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तेरी जान को Tuesday, April 17,2018 8: 15 AM क्या है मेरा और तेरा न्याता जो मनको हमेशा सुहाता कोई किसीको कुछ भी नहीं कहता फिर भी मन उसी में लपेटा रहता। काहे की है चिंता वोही तो ज़िंदा रखता छोडो सब उसके लिए वोही तो ऊपर है हमारे लिए। सर उठाकर मत देखो उसपर हमेशा भरोसा रखो वो सबकुछ तो जानता हो उसकी जानकारी से सबकुछ देता तो है। ना कर जिंदगी से छेड़खानी और अपनी मनमानी मत लुटा अपनी जिंदगी बन के अभिमानी मिट जाएगा, चल बसेगा दुनिया छोड़ के फानी। वो तो ऊपर उठाएगा पर तू ना गा अपना आलाप तू करता रह जाएगा विलाप। बुजुर्गो ने कहा है "तेरु जगह कहाँ है "? क्यों गुरुर है तुझे अपने आप पर? नैया तो उसने लगानी है पार? मत रह चूर अपने गुमान से ज़िंदा रह अपने स्वमान से सब कुछ मिलेगा, पर देर से सोच कर तो देख, अपने मन से? ना तेराकुछ यहां था और है बस सब कुछ तो छोड़ के जाना है! मेरा तेरा कुछ भी तो नहीं फिर भी मन मानता नहीं। कर के देख, एक दिन पछताएगा जब जबक़यामत का दिन नजदीक आएगा तेरी आँखों से आंसू अनराधार बहेंगे वो तेरी जान को ले जाकर ही रहेंगे।

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