वाह रे नौजवान
A
0
Altın Yaprak
वाह रे नौजवान
कहाँ गई तेरी शान,
जल रहा है ये देश तेरा
क्यों है यूँ अनजान
वाह रे नौजवान
कहाँ गई तेरी शान....//
उठ उठा ले अब कमान
लेले दुशमनों की जान
मासूमों कि सिसकियों पर
लुटा दे अपनी जान
वाह रे नौजवान
कहाँ गई तेरी शान...... //
क्यों आया है ये तुफान
क्यों जला है ये मकान
क्यों भाइयों ने ली है
अपने भाइयों की जान
वाह रे नौजवान
कहाँ गई तेरी शान......//
पहले हैं हम इंसान
फिर हैं हिन्दू मुसलमान
ऐ हिंद के वासी
ये तेरा अपना हिनदुस्तान
वाह रे नौजवान
कहाँ गई तेरी शान...... //
Bu şiiri puanla
Henüz puan verilmemiş