ऎेसा होता कहाँ हैं?
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Altın Yaprak
कौन कहता है की हम दोनों जुदा जुदा हैं
रात में उजाला और सुबहा में अँधेरा ऎेसा होता कहाँ हैं
मिल गयी हैं नज़रे तो दिल भी मिल जायेंगे
लोग समझते हैं अक्सर, मगर ऎेसा होता कहाँ हैं
तस्वीर संग खीचने से किसके मिज़ाज मिलते हैं
दोनों के चेहरे हँसते हों ऎेसा होता कहाँ हैं …
बाद कोशिशों के उम्मीद भी दम तोड़ देती हैं अक्सर
हर कोशिश का अंजाम मिल जाये ऎेसा होता कहाँ हैं
अदालतें मुकद्दमा तो लगा देती हैं उनपर
गुनहगार को मिल जाये सज़ा ऎेसा होता कहाँ हैं
गिरेबान में झांक कर तो देख लिया तूने ए "आशी "
रूह और जिस्म का रिश्ता समझ में आ जाये ऎेसा होता कहाँ हैं.
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