एक सपना था, अच्छा है....
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Altın Yaprak
बेकरार दिल बेचैन बहुत है
बादल घने हैं, तूफ़ान उठने को है
पंछी भी अपने घौसलों में बैठे हैं
लगता है जैसे आसमान टूटने को है
बड़ा सन्नाटा है, ख़ामोशी है इस जगह
इन घाटियों में कोई ज्वालामुखी फूटने को है
झट से आंख खुली और पट से उठ बैठा
डर रहा था मैं जिससे एक सपना था, अच्छा है
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