हो के न हो....
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Altın Yaprak
दो घडी बैठकर,
इन बहरों में कहीं
आँखों ही आँखों से कुछ बातें कर ले
क्या जाने फिर अपने नसीब में ये रातें- हो के न हो
बादल कुछ घिरे हैं
तूफ़ान सा उठने को है
हवाओं ने भी शोर मचाना शुरू किया है
क्या जाने फिर ये सुकून से दीदार - हो के न हो
एक गुमान है दिल में
क्या तुम्हारे दिल में प्यार बाक़ी है
इन आँखों से ज़रा झांक के देख लेने दो
न जाने फिर तुम्हे इंतज़ार - हो के न हो.
बहुत गुज़ारे हैं हमने
तक़लीफ़ों में पल साथ-साथ
इन आँखों में अब ये पढ़ लेने दो
साथ चलने की हिम्मत फिर बाकि - हो के न हो.
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