जी नहीं लगता, Jee Nahi Lagta
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Altın Yaprak
जब से वो समाया इन आँखों में बनकर एक सपना
तब से कहीं भी मेरा, जी नहीं लगता
होता है एहसास ज़िंदा होने का मुझको
फिर भी न जाने क्यों, जी नहीं लगता
रहता हूँ अपनों से घिरा अक्सर मैं
बातें होती है सब से लेकिन, जी नहीं लगता
सुख गए आंसू भी, लबों की प्यास भी गयी
सुख और दुःख में भी अब, जी नहीं लगता
वजूद है मेरा सिर्फ नाम के सहारे
आईने में अक्स है पर, जी नहीं लगता
क्या देखता है मुझको, क्या दिख रहा है मुझमे
चलता फिरता रहता हूँ पर, जी नहीं लगता
दुनिया की भागम भाग में एक मैं भी हूँ संग तुम्हारे
चले जा रहे हैं अपनी अपनी मंज़िल की ओर
रास्ते जुदा जुदा हैं सब के लेकिन,
देखो फिर भी किसी का, जी नहीं लगता
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