मुआमला
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Altın Yaprak
लफ़्ज़ों में बयां हो नहीं सकता, ये दिल का मुआमला है
अश्कों से अदा हो नहीं सकता, ये जज़्बातों का मुआमला है
साँसे चल रही हैं, ये ज़िंदा होने की अलामत नहीं है
किसी के दर्द को समझ सके तो ये ज़िंदा होने का मुआमला है
किसी के हालात को समझे, ये एहसासात का मुआमला है
किसी की हौसला अफ़ज़ाई करे, ये इज़्ज़त का मुआमला है
महनत तो हर कोई करता है, सबको उसका फल कहाँ मिलता है
फल मिले न मिले, कोई इसे सराहे ये इंसानियत का मुआमला है
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