रिश्ते हैं आईना
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Altın Yaprak
रिश्ते हैं आईना, दिखाते हैं रूप,
खुशी का रंग हो या हो गम की धूप।
कभी हंसी कि गूंज, कभी आंखों कि नमी,
हर लम्हा बयां करता, दिल कि एक ध्वनि ।
जब साथ होते हैं, तो लगता है जादू,
छोटी-छोटी बातें, बन जाती हैं यादें।
कभी गले लगकर, कभी चुपचाप सुनकर,
ये रिश्ते छिपा है, प्यार का हर रंग।
खुदा के रिश्ते, मक्का की रौशनी,
वफ़ा की राह, इबादत की चाशनी।
माँ-बाप की दुआएँ, भाई का प्यार,
बहन की ममता, दोस्तों की यारी I
खुदा के बनाए रिश्ते, नूर का चश्मा,
इश्क़ की बारिश, दिल का तबस्सुम।
जैसे चमन में फूल खिलते हैं,
हर कली में मोहब्बत का ग़ुस्सुम।
इंसानों के बनाए रिश्ते, रेत की दीवार,
कभी धूप, कभी छाँव का मंज़र।
वादे टूटते, सपने बिखरते,
जैसे बादल छँटते, बदलता समंदर।
इंसानों के रिश्ते, बदलती हवा,
कभी दोस्ती, कभी दुश्मनी का धावा।
झूठे वादे, ग़लतफ़हमी की राहें,
ख़ुशी के पल, ग़म के साए।
रिश्तों का सफ़र, ज़िंदगी का खेल,
खुदा के दिए, इंसानों के मेल।
धूप-छाँव की तरह, साथ चलते,
कभी हँसी, कभी आँसुओं का रेल।
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