दफन- प्रेम पत्र
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Altın Yaprak
वोजो अनगिनत प्रेम पत्र लिखे मैंने
वोआज भी दफन है मेरे सीने में
जिन्हे मै तुम्हारी यादोंका तोहफा समझ
लिए फिर रहा हूँ और ये मेरे साथ अंतिम साँसों तक रहेंगे
मुझे पूरा यक़ीन है की तुम ने भी इन्हे संभाल रखा होगा
ऐसी जगह जहाँ तुम्हारे सिवा और कोई नहीं पहुंच सके
और उन्हें पढ़ती होगी कभी कभी डरते हुए की
कहीं किसी को पता न चले और कोई देख ना ले
अतीत की छाया कहीं वर्तमान और भविष्य पर न पड़े
इसलिए मै तो कहता हूँ के इन्हे आज़ाद कर दो आकाश में
उड़ने दो पंछीबन हवाओं में या फिर राख ही बन जाने दो
शायद येआकाश में सितारों संग पनाह पा ले
या फिर धरती पर सुगंध हो बिखर जाये
बेशक ये हमारे अतीत की कब्रें बन शांति पा लें
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