गाथा (Hindi)
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Altın Yaprak
गा था
जिस प्रकार
रात के गर्भ से
उगता है दिन
ठीक वैसे ही
झूठ से सिरजेगा सत्य
क्यों महोदय,
सच कहा न?
कृपया हाँ में हाँ न मिलाईये
समझ कर बूझ कर बतलाईये.
आज का झूठ
कल का सच बने
तो क्या अचरज
जैसे बीते कल का सच
कई बार
बनते देखा गया है झूठ.
यह भी सच है
किन्तु केवल वहीँ तक
जहाँ तक सवाल है
आज का
आने वाले कल का
क्या कह सकता है कोई.
जब आने वाले कल का ‘गा’
बन जाता है
बीते हुये कल का ‘था’
तो खुद ब खुद
बन जाती है ‘गाथा’
यानि एक कसौटी.
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