कविता के झरोखे से।
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Altın Yaprak
जब सारी दुनिया सोती है
तुम तारे गिना करते हो
समय के प्रति पल में
अपनी विचारों को
बिखेरा करते हो।।
ऐसा नहीं की तुम्हारे विचार
मन मस्तिष्क में टकरा कर रह जाते हैं
बल्कि यह विचार
समय के प्रवाह में बह जाते हैं
और फिर तुम कहते हो
कि ऐसा ही मैंने सोचा था।।
तुम्हारी अनुप्रेरणा
सृष्टि की धूरी बन जाती है
क्योंकि रात भर जगकर
तुम यही सोचा करते थे।।
आज काया बदली जीवन की
समय ने करवट बदल लिया
तुम्हारी कल्पना कविता बन
नव जीवन श्रृंगार किया।
क्या तुमने कभी ऐसा सोचा था
ऐसा भी एक दिन आएगा
तुम्हारी एक एक कल्पना
श्रृंगार करेगी युग के आभूषण से
भर देगी खुशियां
प्रकृति के हर कण कण में।।
ऐ मेरे प्रिय कवि
कविता लिखना ही एक कर्म नहीं
शुद्ध चेतना के झरोखे से
अपने आप को बिखेरना
यह भी बड़ा कर्म है।।
Created on 28/3/2026
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@ Ramesh Rai
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