चांद के आंगन में।
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Altın Yaprak
चांद के आंगन में
जश्न मना है मानव का।
हर जीवन मुस्कान बनी है
एक नई उर्जा को लेकर।।
मन्द मन्द हवाओं से
बहती है निश्छल धारा।
शुरु हुआ एक नए सोपान का
तरंगित होती नभ सारा।।
तुम हो युग के प्रहरी
दसों दिशाओं की आभा बिन्दु।
सप्त रंगों से सजी प्रकृति
उतरी आज चांद धरा पर।।
Created on 8/9-18/9 2025
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@ Ramesh Rai
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