किष्किन्धाकाण्ड
T Tulsidas
Günün şiiri
· 09 Ağustos 2026
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Altın Yaprak
जब अंगदादिन की मति गति मंद भई,
पवन के पूत को न कूदिबे को पलु गो।
साहसी ह्वै सैल पर सहसा सकेलि* आइ,
चितवत चहूँ ओर, औरन को कलु गो॥
‘तुलसी’ रसातल को निकसि सलिल आयो,
कोल कलमल्यो, अहि कमठ को बलु गो।
चारिह चरन के चपेट चाँपे चिपटि गो,
उचके उचकि चारि अंगुल अचलु गो॥
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Metnin kaynağı: Kamu malı arşiv
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