सखी तुम मत घबराना
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Altın Yaprak
सखी तुम मत घबराना/ दरवेश
सुन री सखी तुम मत घबराना
जीवित है अभी तेरा दीवाना
बसंती रंगो से रंग जाना
तुमको सुंदर दुल्हन बनाना
सुन री सखी तुम मत घबराना
सुन री सखी भूल मत जाना
मै तेरा वही आशिक पुराना
बदला भेष है नया जमाना
और कितने बार है मुझको आना
है कितने बार मुझे मर जाना
सुन री सखी तुम मत घबराना
सुन री सखी तुम गले लग जाना
इस बार मुझे नहीं है धोखा खाना
अपने घर में क्यों घबराना
अग्नि मत भर अनर्थ हो जयेगा
अगर मुझको गुस्सा आयेगा
अपने हैं, है सब को समझाना
नहीं माने तो आता है मनाना
आना है हर-बार, कफन बाँध के आना
सुन री सखी तुम मत घबराना
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